Iran Israel War: ईरान पर बीते शनिवार की दोपहर को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर भीषण हवाई हमला किया। इजरायल ने तो दावा किया कि उसके 200 फाइटर जेट ने इस ऑपरेशन में हिस्सा लिया। लेकिन सवाल है कि जब ईरान से बातचीत चल रही थी तो अचानक हमला क्यों करना पड़ा। इसको लेकर अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को दोबारा खड़ा करने के लिए तेजी से काम कर रहा था। अधिकारी के अनुसार, पिछले साल किए गए अटैक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा जो इन्फ्रास्ट्रक्चर तबाह किया गया था, उसे वह दोबारा तैयार कर रहा था।
अमेरिकी अफसर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि खुफिया एजेंसियों को ऐसी जानकारी मिली थी संकेत मिले थे कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम के इन्फ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत और पुनर्निर्माण में लगा हुआ है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारी ने यह जानकारी गुमनाम रहने की शर्त पर दी। उन्होंने आगे कहा कि मुझे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हमले से फैसलों पर आधिकारिक तौर पर बोलने की अनुमति नहीं थी, इसलिए अपना नाम सार्वजनिक नहीं कर सकता।
अधिकारी के मुताबिक, खुफिया रिपोर्ट में यह भी पता चला था कि ईरान ने हाई क्वालिटी वाले Centrifuges खुद बनाने की क्षमता डेवलप कर ली है। सेंट्रीफ्यूज वो होते हैं जिनका उपयोग यूरेनियम को Enrich करने के लिए किया जाता है। अगर किसी देश के पास अत्यधिक परिष्कृत सेंट्रीफ्यूज टेक्नोलॉजी हो, तो वह उच्च स्तर का संवर्धित यूरेनियम को तैयार कर सकता है। उसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है।
अमेरिकी अधिकारी का मानना है कि इसी वजह से वॉशिंगटन, ईरान की एक्टिविटीज को लेकर गंभीर तौर पर चिंतित था। उनके मुताबिक, ईरान की बढ़ती तकनीकी क्षमता के क्षेत्रीय और दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा बनने की संभावना थी। हालांकि, ईरान पहले भी यह कहता आया है कि उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, न कि हथियार बनाने के लिए।
अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष का लेटेस्ट अपडेट यहां पढ़ें
संपादक की पसंद